‘स्वच्छता एवं शहरी विकास’ की ओर तेजी से अग्रसर उत्तर प्रदेश का गाजियाबाद शहर अब ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के सहयोग से ‘कार्बन उत्सर्जन’ घटाने की दिशा में भी अहम भूमिका निभा रहा है। आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (SBM-U) के अंतर्गत जहां एक ओर ‘वेट वेस्ट कंपोस्टिंग’ अपनाकर कार्बन उत्सर्जन कम किया जा रहा है, वहीं अब गाजियाबाद नगर निगम (GMC) ने एक अंतरराष्ट्रीय ‘कार्बन क्रेडिट’ परियोजना के लिए पंजीकरण कराते हुए इस दिशा में एक और मजबूत कदम बढ़ाया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा सत्यापित इस योजना के माध्यम से GMC स्वच्छता के संग पर्यावरण संरक्षण और धन अर्जन के नए रास्ते भी खोल सकेगा। इस तरह मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के बाद गाजियाबाद ‘कचरे से कंचन’ का ऐसा नया स्रोत विकसित करने वाला उत्तर प्रदेश का पहला और देश का दूसरा शहरी स्थानीय निकाय (ULB) बनने जा रहा है।
कार्बन उत्सर्जन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो धरती के लिए आवश्यक तापमान को बढ़ाती है। मगर कार्बन फुटप्रिंट है मानव गतिविधियों से वातावरण में अनावश्यक कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैसों का छोड़ा जाना। ग्रीनहाउस गैसें पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद होती हैं और सूर्य से आने वाली गर्मी रोककर पृथ्वी के तापमान को बढ़ा देती हैं। मुख्य ग्रीनहाउस गैसों में जल वाष्प (H2O), कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), मीथेन (CH4), नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) और ओजोन (O3) शामिल हैं। ये उत्सर्जन मुख्य रूप से मानवीय गतिविधियों, जैसे जीवाश्म ईंधन के जलने, औद्योगिक प्रक्रियाओं और वनों की कटाई के कारण होते हैं। गैसों के रूप में होने वाला कार्बन उत्सर्जन, खासकर CO2 को ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का एक प्रमुख कारण माना जाता है। ‘कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना’ (CCTS) एक बाज़ार-आधारित तंत्र है जो ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन घटाने के लिए डिज़ाइन किया गया है और इंडस्ट्रीज को इसके लिए प्रोत्साहित करता है। वहीं, ऐसे उद्योग जो सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य से कम उत्सर्जन करते हैं, वे अतिरिक्त कार्बन क्रेडिट उन उद्योगों को बेच सकते हैं जो लक्ष्य से अधिक उत्सर्जन करते हैं।
शहरी परिदृश्य में स्वच्छ भारत मिशन का कार्बन उत्सर्जन से सीधा संबंध है। मिशन का उद्देश्य स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार करना है, जिससे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने में मदद मिलती है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ठोस कचरा प्रबंधन में सुधार से मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम होता है, जो कचरा डंपिंग साइटों से उत्पन्न होती है। इसके अलावा स्वच्छ ईंधन और ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देने से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। गाजियाबाद नगर निगम ने इसी दिशा में दूरदर्शी सोच और सतत विकास के लक्ष्यों (SDGs) के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाते हुए यूनाइटेड नेशन्स फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) द्वारा समर्थित वैरिफाइड कार्बन स्टैंडर्ड (VCS) के अंतर्गत मान्यता प्राप्त की है।
GMC द्वारा एक ओर पूरे शहर में पुरानी स्ट्रीट लाइट्स को बदलकर उन्हें ऊर्जा-सक्षम LED लाइट्स में परिवर्तित किया गया है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आने के साथ-साथ बिजली की बचत भी हो रही है, वहीं दूसरी ओर ‘वेट वेस्ट कंपोस्टिंग’ को अपनाकर गीले कचरे से कंपोस्ट खाद भी बनाई जा रही है। अपशिष्ट प्रबंधन की इस प्रक्रिया से कचरा भी तेजी से खत्म हो रहा है, साथ ही ग्रीन हाउस गैसों (GHGs) के उत्सर्जन में भी कमी आ रही है। इन प्रयासों से लगभग 2.7 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आएगी, जो 2.7 लाख कार्बन क्रेडिट के बराबर है। 1 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की कमी 1 कार्बन क्रेडिट के बराबर है और इन प्रमाणित कार्बन क्रेडिट्स को अंतर्राष्ट्रीय कार्बन बाजार में बेचकर राजस्व में बदला जा सकता है। यह पहल स्वच्छता संग पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगी और गाजियाबाद को आर्थिक रूप से सशक्त भी बनाएगी। एक अनुमान के मुताबिक गाजियाबाद का लक्ष्य कार्बन क्रेडिट बेचकर सालाना अनुमानित ₹1 करोड़ कमाना है।
अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरकर गाजियाबाद ने उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश भर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शहरों को प्रेरित किया है। GMC ने ऊर्जा दक्षता सहित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में बीते वर्षों में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सत्यापित कार्बन मानक VCS का प्रबंधन करने वाले गैर लाभकारी संगठन वेरा (Verra) की रजिस्ट्री में दिसंबर 2023 में प्रस्तुत इस शहर की परियोजना को जून 2025 में सफलतापूर्वक सत्यापन मिला है। कार्बन मानक सत्यापन के लिए यह बेहद तकनीकी एवं कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया है।
ऑनलाइन रिपोर्ट्स के मुताबिक GMC से पहले केवल मध्य प्रदेश में इंदौर नगर निगम (IMC) ही कार्बन क्रेडिट परियोजनाओं के लिए पंजीकरण कराने वाला पहला ULB बना था, जिसने कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग परियोजनाओं में भागदारी निभाई। इसके बाद GMC द्वारा कंपनी कार्बन क्रेडिट बेचकर राजस्व अर्जित करने की योजना बनाकर परियोजना रिपोर्ट तैयार करने और UNFCCC में पंजीकरण कराने के लिए सलाहकारों को नियुक्त किया गया था। इसी तरह की एक पहल के रूप में गाजियाबाद नगर निगम ने एक ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड भी जारी किया था, जिससे एक उच्च तकनीक वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए ₹150 करोड़ जुटाए गए थे।
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