Swachh Bharat Mission-Urban

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SBM-U 2.0 के प्रभाव से स्वच्छ भारत की ओर गोरखपुर का सशक्त कदम

sbmurban / Trash Tales / March 9 , 2026

स्वच्छ भारत मिशन – अर्बन 2.0 के प्रभाव से देश भर में स्वच्छता एक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। इसी प्रेरणा से गोरखपुर नगर निगम ने रामघाट, राप्ती नदी के तट पर एक प्रेरणादायक स्वच्छता अभियान का आयोजन किया। “स्वच्छता की नई पहल – बढ़ाएं हाथ, करें सफाई साथ” नाम के इस अभियान ने न केवल घाट की तस्वीर बदली, बल्कि नागरिकों के मन में जिम्मेदारी की नई चेतना भी जगाई।

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सुबह की हल्की धूप और राप्ती के शांत प्रवाह के बीच रामघाट पर अभियान के दौरान एक अलग ही ऊर्जा देखने को मिलती है। 500 से अधिक नागरिक, यूनिवर्सिटी के छात्र, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और स्थानीय निवासी एक ही उद्देश्य, अपने शहर को स्वच्छ, सुंदर और जागरूक बनाने के लिए से एकत्र होकर आगे बढ़ रहे हैं। अभियान के दौरान घाट परिसर और नदी तट से 170 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा एकत्र किया गया। इस कचरे को वैज्ञानिक पद्धति से पुनर्चक्रण के लिए भेजा गया, जिससे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ठोस कदम उठाया गया। यह पहल केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोगों को यह समझाने का माध्यम भी बनी कि प्लास्टिक प्रदूषण नदी और ईको-सिस्टम के लिए कितना हानिकारक है।

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इस अभियान का सबसे आकर्षक पहलू रहा ‘पेंट माई घाट’ कार्यक्रम। घाट की दीवारों और सीढ़ियों पर रंग-बिरंगी कलाकृतियां उकेरी गईं। इन चित्रों में नदी संरक्षण के संदेश, स्वच्छता की प्रेरक झलकियां और स्थानीय संस्कृति की अभिव्यक्ति देखने को मिली। कहीं बच्चों को कचरा डस्टबिन में डालते देखा गया, तो कहीं “मेरा घाट, मेरी जिम्मेदारी” जैसे संदेशों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इन कलाकृतियों ने रामघाट को न केवल स्वच्छ बल्कि सौंदर्यपूर्ण और जीवंत बना दिया। अभियान का प्रभाव तुरंत दिखाई देने लगा, स्थानीय नागरिकों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी और नदी किनारे कचरा फेंकने की प्रवृत्ति में उल्लेखनीय कमी आई। जो लोग पहले ऐसे अभियानों से दूर रहते थे, वे भी इस पहल का हिस्सा बने। विशेष रूप से युवाओं में जिम्मेदारी की भावना प्रबल हुई। छात्रों के लिए यह केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक सीख बनी कि शहर की स्वच्छता में उनकी सक्रिय भूमिका है।

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इस सामूहिक प्रयास ने यह सिद्ध कर दिया कि जब प्रशासन और नागरिक मिलकर कार्य करते हैं, तो परिवर्तन अवश्यंभावी हो जाता है। रामघाट पर हुआ यह आयोजन एक दिन का कार्यक्रम भर नहीं रहा, बल्कि गोरखपुर के स्वच्छ भविष्य की दीर्घकालिक नींव है। इसने शहरवासियों के मन में यह विश्वास जगाया कि स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। यह पहल न केवल स्वच्छ भारत के लक्ष्य को सशक्त बनाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सामूहिक संकल्प और सक्रिय भागीदारी से किसी भी शहर को नई पहचान दी जा सकती है। गोरखपुर ने अपने कदम बढ़ा दिए हैं—अब लक्ष्य है देश के सबसे स्वच्छ और प्रेरणादायक नदी तटों में स्थान बनाना।