Swachh Bharat Mission-Urban

Swachh Bharat Mission-Urban

  Mission Updates 

img

स्वच्छ माघ मेले में SBM-U 2.0 का ‘स्वच्छ आदत से स्वच्छ भारत’ अभियान हुआ चरितार्थ

sbmurban / Trash Tales / February 13, 2026

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में संगम के तट पर इस वर्ष आयोजित 'स्वच्छ माघ मेला 2026' अपनी बेहतर स्वच्छता व्यवस्थाओं और बेहतरीन प्रबंधन की एक नई मिसाल बन गया है। आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (SBM-U) 2.0 के विजन को धरातल पर उतारने के लिए मेला प्राधिकरण ने विभिन्न सरकारी विभागों के साथ मिलकर एक मजबूत तंत्र विकसित किया। इस आयोजन का मुख्य आकर्षण 'स्वच्छ आदत से स्वच्छ भारत' अभियान बना, जो श्रद्धालुओं को केवल पर्यटक नहीं, बल्कि स्वच्छता का भागीदार भी बना रहा है।

संगम की पावन धरती पर 44 दिनों तक चलने वाला यह समागम अब समापन की ओर है। इस वर्ष मेले में 15 करोड़ श्रद्धालुओं और 10 लाख कल्पवासियों के लिए स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण बनाया गया। त्रिवेणी के संगम पर लगभग 800 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्रफल और 07 सेक्टर्स में फैले यह सिद्ध कर दिया कि वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन और संसाधनों का सही नियोजन कैसे एक बड़े आयोजन को 'जीरो वेस्ट' मॉडल में परिवर्तित कर सकता है। विशाल तटवर्ती क्षेत्र में करोड़ों की भीड़ के बावजूद मेला परिसर को खुले में शौच से मुक्त (ODF) बनाया गया, साथ ही 'जीरो लिक्विड डिस्चार्ज' के लक्ष्यों को भी हासिल किया गया।

img
img



श्रद्धालुओं की गरिमा और स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए परिसर में कुल 23,700 से अधिक शौचालयों की व्यवस्था की गई, जिसमें 1237 पुरुष व 825 महिला FRP सामुदायिक शौचालय, 907 स्टील शौचालय और 2186 सीमेंटेड शौचालय शामिल रहे। इसके अतिरिक्त, दूर-दराज से क्षेत्रों और पार्किंग स्थलों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 3150 कनात शौचालयों और 2000 से अधिक यूरिनल ब्लॉक्स की व्यवस्था की गई। प्रशासन ने शौचालयों के बाहर QR कोड आधारित फीडबैक की व्यवस्था भी की। मेला परिसर में 109.57 किलोमीटर लंबी ड्रेनेज लाइन और 85 किमी की विशेष सीवर लाइन बिछाई गई थी। सबसे महत्वपूर्ण कदम के रूप में, 0.5 MLD क्षमता का अस्थायी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) निरंतर कार्यरत रहा, जिसने यह सुनिश्चित किया कि मेले का एक बूंद भी प्रदूषित जल बिना शोधन के गंगा-यमुना की धाराओं में समाहित न हो।




मेले की स्वच्छता सुचारू बनाने के लिए मेला प्राधिकरण के साथ प्रयागराज नगर निगम बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सीमावर्ती शहरी हिस्सों की निरंतर सफाई सहित मेले के ठोस अपशिष्ट को शहर के प्रोसेसिंग प्लांट तक नियमित रूप से पहुंचाया जा रहा है। पूरे मेला क्षेत्र में 8000 कूड़ेदान रखे गए और कचरा संग्रहण के लिए 25 हॉपर टिपर व 12 कॉम्पैक्टर लगातार तैनात रहे। कचरे को सही तरीके से व्यवस्थित करने के लिए 10 लाख लाइनर बैग्स उपयोग किए गए, ताकि संक्रमण का खतरा न रहे। आयोजन को स्वच्छ एवं सफल बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाने वाले 3300 सफाईमित्रों ने तीन पालियों में 24 घंटे निरंतर काम किया।

प्रशासन ने इन सफाईमित्रों के लिए न केवल 'सैनिटेशन कॉलोनी' और उनके बच्चों के लिए आंगनवाड़ी केंद्र संचालित किए, बल्कि 'स्वच्छ कुम्भ कोष' के माध्यम से उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की और वेतन का सीधा हस्तांतरण सुनिश्चित किया।

img
img




स्वच्छता के इस मॉडल ने स्थानीय अर्थव्यवस्था और श्रद्धालुओं की आदतों पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। 'वोकल फॉर लोकल' को बढ़ावा देते हुए स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को कपड़े के थैले और प्राकृतिक विकल्पों के वितरण से जोड़ा गया, जिससे मेले में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के उपयोग में कमी दर्ज की गई है। इस प्रबंधन के माध्यम से करीब 5,000 स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ। बेहतर स्वच्छता व्यवस्था के चलते विदेशी पर्यटकों का आगमन पिछले वर्षों की तुलना में अधिक हुआ।





मेले में इस वर्ष पहली बार पूरे मेला क्षेत्र को 'जीरो एनिमल जोन' घोषित किया गया, जिससे सड़कों और घाटों पर पशु अपशिष्ट की समस्या समाप्त हो गई। मेले को 'सिंगल यूज प्लास्टिक फ्री' बनाने के लिए इस बार 'कुलहड़' और 'दोना-पत्तल' का उपयोग अनिवार्य किया गया, जो पर्यावरण हितकारी रही। कचरा प्रबंधन में एक प्रभावी कदम 'ऑन-साइट कंपोस्टिंग' भी रहा, जहां लंगर और शिविरों के गीले कचरे को मेले के भीतर ही मोबाइल कंपोस्टिंग इकाइयों के माध्यम से खाद में बदला जा रहा है।

img

यह मेला तकनीक और जल स्वच्छता के मोर्चे पर भी अग्रणी रहा, जहां शुद्ध पेयजल के लिए 10 वॉटर एटीएम, 23 नलकूप और 33,223 कैंप कनेक्शन दिए गए थे। पूरे परिसर की स्वच्छता निगरानी के लिए 400 से अधिक AI-आधारित CCTV कैमरों का उपयोग किया गया, जो कूड़े के ढेर या गंदगी दिखने पर तुरंत रिस्पॉन्स टीम को अलर्ट भेजते थे। समापन की ओर बढ़ते इस मेले ने यह संदेश दिया है कि यदि इच्छाशक्ति और आधुनिक तकनीक का मेल हो, तो इतने बड़े स्तर का आयोजन भी पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल और स्वच्छ हो सकता है।

img