उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कभी मुश्किलों का सबब रहा ‘घैला डंपसाइट’ अब अद्भुत कायाकल्प का साक्षी बनकर एक भव्य पार्क के रूप में शहर की नई पहचान बन चुका है। भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (SBM-U) 2.0 के सहयोग से लखनऊ नगर निगम (LMC) ने करीब 30 एकड़ में फैले 20 साल पुराने कचरे के पहाड़ को हटाकर अब तकरीबन 65 एकड़ भूमि पर भव्य 'राष्ट्र प्रेरणा स्थल' का निर्माण किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर 2025 को पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर यह पार्क जनता को समर्पित किया, जिसका रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के सांसद श्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में लोकार्पण किया गया।
20 साल का संकट, 1.5 साल में समाधान : SBM-U 2.0 का मुख्य लक्ष्य कचरा मुक्त शहर है, इसके अंतर्गत शहरों में जमा पुराने कचरे के ढेर (Legacy Waste Dumpsites) को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य भी शामिल है। लखनऊ में यह 'राष्ट्र प्रेरणा स्थल' बसंत कुंज में सीतापुर और हरदोई रोड के बीच दुबग्गा के पास गोमती नदी के किनारे बनाया गया है। पहले यहां घैला डंपसाइट पर पिछले दो दशकों से लगभग 8 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा जमा था, जिसके चलते आसपास के 800 घरों में रह रहे परिवारों का जीवन दूभर हो गया था। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 2021 में शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट ने महज डेढ़ साल के भीतर, कचरे के इस विशाल ढेर को पूरी तरह समाप्त कर दिया। लक्ष्य जीरो डंपसाइट्स के तहत, घैला डंपसाइट के कचरे को वैज्ञानिक तरीके से बायो-रिमिडिएशन के जरिए हटाया गया। MoHUA द्वारा उपलब्ध कराए गए तकनीकी ढांचे और 15वें वित्त आयोग के बजट ने इस कठिन कार्य को मुमकिन बनाया। कुछ इस तरह प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में 'कचरा मुक्त शहर' के आह्वान को हकीकत में बदलते हुए, लखनऊ नगर निगम (LMC) ने इस बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य को संभव कर दिखाया।
'राष्ट्र प्रेरणा स्थल' नाम के पीछे की प्रेरणा : इस स्थल का कायाकल्प केवल पर्यावरण की दृष्टि से सुधार कार्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी विकसित किया गया है। इस स्थान का नाम 'राष्ट्र प्रेरणा स्थल' रखने का उद्देश्य इसे एक ऐसा केंद्र बनाना है, जहां से भावी पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण का पाठ पढ़ाया जा सके और राष्ट्रवाद की भावना से जोड़ा जा सके। यह डंपसाइट से 'डेस्टिनेशन' बनने की एक ऐसी यात्रा है, जो शहर सहित आसपास के क्षेत्र में रहने वाले निवासियों को गौरवान्वित महसूस कराती है। प्रधानमंत्री ने उद्घाटन के दौरान इस बात पर खास जोर दिया कि यह स्थल 'वेस्ट टू वेल्थ' और 'वेस्ट टू वेलनेस' का सबसे सटीक उदाहरण है।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं : इस परियोजना के अंतर्गत बायो-रेमेडिएशन तकनीक के माध्यम से कचरे को अलग-अलग श्रेणियों (गीला, सूखा, प्लास्टिक) में बांटा गया। इस प्रक्रिया से ईंधन के रूप में निकलने वाले कचरे यानी रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (RDF) को सीमेंट कारखानों में ऊर्जा के रूप में उपयोग के लिए भेजा गया। वहीं पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए पूरे क्षेत्र को संक्रमण मुक्त किया गया।
प्रेरणा स्थल की प्रमुख खूबियां : लखनऊ के इस राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल पर तीन महानायकों, राष्ट्र के तीन महान वैचारिक स्तंभों — पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी, श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 65-65 फीट ऊंची विशाल कांस्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। ये प्रतिमाएं देश की एकता, अंत्योदय और सुशासन का संदेश देती हैं। सांस्कृतिक और शैक्षिक हब बनाने के लिए यहां एक अत्याधुनिक म्यूजियम और डिजिटल गैलरी बनाई गई है, जो इन महापुरुषों के जीवन और संघर्ष की गाथा को प्रदर्शित करती है। विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर इस विशेष स्थल पर 3,000 की क्षमता वाला ओपन-एयर थिएटर और प्रदर्शनी मैदान तैयार किए गए हैं। यह एक ऐसा शहरी शांतिपूर्ण टापू बन गया है, जहां नागरिकों के लिए योग व ध्यान केंद्र, सेमिनार रूम और वीआईपी लाउंज जैसी आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की गई हैं।
शहरी विकास और आर्थिक लाभ : शहरी विकास के नजरिए से देखें, तो यह परियोजना केवल कचरा साफ करने की नहीं, बल्कि कीमती जमीन को दोबारा उपयोगी बनाने (Land Reclamation) की भी रही है। इस पूरी प्रक्रिया में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने भी सहयोगी की भूमिका निभाते हुए आसपास के क्षेत्र को नियोजित विकास से जोड़ने में मदद की है। पर्यावरण और स्वास्थ्य के नजरिए से देखा जाए, तो वर्षों से जहरीली गैसों और गंदे पानी की समस्या का सामना कर रहे परिवारों के लिए यह प्रोजेक्ट एक नया जीवन लेकर आया है। अब यहां की वायु गुणवत्ता और भूजल स्तर में सुधार हुआ है। डंपसाइट के नजदीक होने से यहां जमीनें बेकार हो चुकी थीं और उनकी कीमतें शून्य हो गई थीं, अब इस पार्क के निर्माण के बाद LDA और निजी बिल्डर्स द्वारा आवासीय और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स विकसित किए जा रहे हैं। इससे शहर की इकोनॉमी को बूस्ट मिल रहा है और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। MoHUA के दिशा-निर्देशों के तहत यहां वर्षा जल संचयन और सौर ऊर्जा का भी उपयोग किया जा रहा है, जो इसे एक 'सस्टेनेबल पार्क' बनाता है।
MoHUA और स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत इस पहल ने साबित कर दिया है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो शहर के सबसे गंदे और चुनौतीपूर्ण स्थानों को भी खूबसूरत पर्यटन स्थलों में बदला जा सकता है। लखनऊ का यह 'राष्ट्र प्रेरणा स्थल' अब केवल एक पार्क नहीं है, बल्कि यह SBM-U 2.0 की सफलता का जीवंत प्रमाण है। लखनऊ नगर निगम द्वारा कार्यान्वित यह प्रोजेक्ट आज केवल स्वच्छता का प्रतीक ही नहीं, आत्मनिर्भर और स्वच्छ भारत की एक नई पहचान बन गया है।