स्वच्छता और स्वच्छ भारत मिशन का जिक्र होने पर अक्सर लोग शौचालयों के निर्माण या साफ-सफाई के लिए चलाए गए अभियान की चर्चा करते हैं। मगर आज जन आंदोलन बन चुके इस अभियान के तहत सिर्फ शौचालयों की नहीं, बल्कि आधुनिक सुविधाओं से लैस आकांक्षी शौचालयों की बात होती है। वर्तमान में महज स्वच्छता की नहीं, बल्कि आर्टिफीशियल इंटेलिजेंट (AI) सेंसर बेस्ड, डिजिटल और स्मार्ट स्वच्छता सुविधाओं की चर्चा होती है। उत्तर प्रदेश का आगरा शहर भी कुछ इसी तरह अत्याधुनिक और स्मार्ट स्वच्छता सुविधाओं की ओर अग्रसर है।
आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) और आगरा नगर निगम (AMC) की संयुक्त अगुआई में स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (SBM-U) 2.0 के अंतर्गत स्मार्ट और डिजिटल पहलों के जरिए ताजमहल की नगरी अब आधुनिक कचरा प्रबंधन की मिसाल बन रही है। नगर निगम के सक्रिय नेतृत्व में वर्ष 2025 तक अपनाए गए नए-नए डिजिटल समाधान न केवल शहर भर में कचरा संग्रहण की रियल-टाइम मॉनिटरिंग प्रदान कर रहे हैं, बल्कि सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट को भी मजबूती दे रहे हैं। ये प्रयास SBM-U 2.0 के मुख्य उद्देश्यों – 100% वेस्ट सेग्रीगेशन, लैंडफिल के जीर्णोद्धार और नागरिक सहभागिता से सीधे तौर पर जुड़े हैं, जो MoHUA द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों से प्रेरित हैं।
आगरा नगर निगम ने अक्टूबर 2025 में एक प्रभावशाली AI-पावर्ड सॉल्यूशन लॉन्च किया, जो पूरे शहर में CCTV कैमरों पर एनालिटिक्स का उपयोग कर सड़कों और चौराहों पर फैले कचरे की रियल-टाइम डिटेक्शन हासिल करता है। इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य AI का उपयोग कर कचरा जमा होने वाले ‘हॉटस्पॉट’ की स्मार्ट पहचान करना है, ताकि सही समय पर और सही स्थान पर स्वच्छता के लिए निर्देश दिए जा सकें। यह सिस्टम कचरे की पहचान करते ही अलर्ट जनरेट करता है, ताकि निगम की स्वच्छता टीम तुरंत रिस्पॉन्स कर सके। MoHUA, SBM-U की डिजिटल इनोवेशन पॉलिसी और नगर निगम की इनोवेटिव स्ट्रैटेजी के तहत विकसित यह टूल उत्तर प्रदेश की उन्नत स्वच्छता संबंधी पहलों में शुमार है।
आगरा स्मार्ट सिटी के इंटिग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) और नगर निगम के सहयोग से डोर-टू-डोर (D2D) कचरा संग्रहण की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग भी शुरू हुई है। ग्लोबल पॉजिशनिंग सिस्टम (GPS) - से लैस वाहनों की ट्रैकिंग और सुपरवाइजर अटेंडेंस मॉनिटरिंग के जरिए यह व्यवस्था संग्रहण संबंधी रूट्स को निर्धारित करता है, जिससे स्रोत स्तर पर ही कचरे का सेग्रीगेशन सुनिश्चित होता है। इससे न केवल खुले में जगह-जगह कचरा जमा होने की समस्या कम हो रही है, बल्कि नागरिक प्रतिक्रिया के माध्यम से MoHUA की स्वच्छता ऐप से नागरिकों का जुड़ाव भी बढ़ा है।
शहर में एक बड़ा कदम कूड़ेदानों को लेकर भी उठाया गया है, जहां कई जगह भूमिगत कूड़ेदान लगाए गए हैं। इन कूड़ेदानों में बिन वॉल्यूम सेंसर (BVS) लगाए गए हैं, जो IoT (Internet of Things) तकनीक का हिस्सा हैं। भूमिगत कूड़ेदानों में लगे ये सेंसर भी स्वचालित (Automated) रूप से ICCC को जानकारी भेजते हैं कि कूड़ेदान कितना भरा है। इस पहल से काफी सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं और अब कूड़ा ओवरफ्लो होने से पहले ही पूर्वानुमानित शेड्यूलिंग (Predictive Scheduling) के जरिए वाहन खाली करने के लिए भेज दिया जाता है, जिससे सड़कों पर गंदगी नहीं फैलती।
शहर में 3.5 लाख घरों और व्यावसायिक इकाइयों को रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) टैग और क्विक रिस्पॉन्स (QR) कोड दिए गए। अब सफाईमित्र जिस घर पर जाते हैं, अपने पास मौजूद डिवाइस से यह टैग स्कैन करते हैं। यह स्कैनिंग एक डिजिटल प्रमाण बन जाती है कि उस घर से कूड़ा उठा लिया गया है, और यह जानकारी ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज हो जाती है। यहां जियोग्रैफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (GIS) मैपिंग का उपयोग करके सभी वार्डों के डिजिटल नक्शे बनाए गए हैं। इस मैपिंग ने संग्रह संबंधी मार्गों को निर्धारित करने और किसी क्षेत्र में संग्रहण छूटा तो नहीं, यह जानने में मदद की। इस डेटा-संचालित माध्यम से कचरा संग्रह वाहनों की बिना वजह आवाजाही भी कम हुई, जिसके चलते 21% तक ईंधन की बचत हुई।
फील्ड स्टाफ की उपस्थिति और प्रोडक्टिविटी की निगरानी भी एक बड़ी चुनौती थी। इसका समाधान AI और बायोमेट्रिक सिस्टम से किया गया। अब सफाई कर्मचारी AI-आधारित चेहरे की पहचान संबंधी ऐप या बायोमेट्रिक मशीन के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। यह प्रणाली प्रॉक्सी अटेंडेंस यानी किसी के बदले लगा दी जाने वाली गलत हाजिरी से जुड़ी समस्या को खत्म करती है। कर्मचारियों की उपस्थिति जियोफेंसिंग के माध्यम से सीधे उनके कार्यस्थल से जोड़ी गई है। इसके तहत GPS या RFID टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके एक वर्चुअल ज्योग्राफिक बाउंड्री बनाई जाती है, जिससे किसी खास एरिया में मोबाइल डिवाइस के आने या जाने पर सॉफ्टवेयर रिस्पॉन्स देता है। इससे कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ती है और वे उचित समय पर काम पर पहुंचते हैं। इसी के चलते जनशक्ति का उपयोग भी 10% तक बेहतर हुआ है।
आगरा के कचरा प्रबंधन में यह डिजिटल और स्मार्ट ट्रांसफॉर्मेशन वास्तव में हमारे शहरों में आधुनिक स्वच्छता की दिशा में भविष्य की राह दिखाता है। शहर में GPS, RFID, QR Code, IoT सेंसर, AI और बायोमेट्रिक जैसी स्मार्ट टेक्नोलॉजी के एकीकरण से पूरे सिस्टम को पारदर्शी, कुशल और स्वचालित बनाया जा रहा है। सेवाएं बेहतर होने से नागरिकों की शिकायतों में भी कमी आ रही है, सेवाओं के संचालन की लागत में कमी आई है और शहर अब पहले से कहीं अधिक साफ और प्रबंधित नजर आ रहे हैं।
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